NPCI BHIM में जुड़ेंगे दो नए बैंक, 10 दिन में लॉन्च होगा बायोमेट्रिक UPI

भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली लगातार नए आयाम छू रही है और इसमें NPCI की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। UPI के माध्यम से करोड़ों लोग रोज़मर्रा के लेनदेन को आसान, तेज और सुरक्षित तरीके से पूरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में BHIM ऐप को और मजबूत बनाने की दिशा में NPCI ने एक बड़ा कदम उठाया है। डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से समय-समय पर नए फीचर्स और बैंक जोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को सुविधा मिलती है, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में भी पारदर्शिता बढ़ती है। मौजूदा दौर में यह पहल डिजिटल इंडिया विज़न को आगे बढ़ाने वाली साबित हो रही है।

💥हाल ही में NPCI की ओर से यह संकेत दिया गया है कि BHIM प्लेटफॉर्म में इस साल दो और बैंकों को शामिल किया जाएगा। 🫆इसके साथ ही बायोमेट्रिक आधारित UPI भुगतान को जल्द ही लॉन्च करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है। यह तकनीक भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित और सरल बनाने में मदद करेगी। खासकर उन लोगों के लिए यह सुविधा उपयोगी होगी जो पिन आधारित भुगतान में कठिनाई महसूस करते हैं। आने वाले समय में इसका असर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, यह पहल भारत के डिजिटल भुगतान भविष्य को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

BHIM में दो नए बैंकों की ऑनबोर्डिंग योजना

NPCI की ओर से BHIM प्लेटफॉर्म में इस वर्ष दो और बैंकों को शामिल करने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक उपयोगकर्ताओं तक सुरक्षित UPI सेवाएं पहुंचाना है। नए बैंकों के जुड़ने से ट्रांजैक्शन नेटवर्क और मजबूत होगा। इससे छोटे बैंकों और क्षेत्रीय ग्राहकों को भी बेहतर डिजिटल भुगतान विकल्प मिल सकेंगे। NPCI का मानना है कि बैंक भागीदारी बढ़ने से प्रतिस्पर्धा और नवाचार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, यह कदम BHIM को एक अधिक समावेशी भुगतान मंच बनाने में मदद करेगा।

CEO ललिता नटराज के अनुसार, बैंक ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सरल और तेज किया गया है। NPCI तकनीकी और नियामकीय दोनों स्तरों पर बैंकों को सहयोग दे रहा है। इससे नए बैंकों के लिए BHIM से जुड़ना आसान हो गया है। यह रणनीति खासतौर पर डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप है। बढ़ती बैंक भागीदारी से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे। साथ ही, भुगतान विफलताओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

BHIM के साथ नए बैंकों का जुड़ना व्यापारियों के लिए भी फायदेमंद होगा। व्यापारी ज्यादा ग्राहकों से सीधे UPI भुगतान स्वीकार कर सकेंगे। इससे कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। छोटे दुकानदारों और MSME सेक्टर को इसका सीधा लाभ मिलेगा। NPCI इस विस्तार को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। इसका मकसद सिस्टम की स्थिरता और भरोसे को बनाए रखना है।

Digital payments view showing new banks added to the NPCI BHIM app and the launch of biometric UPI

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम BHIM को निजी UPI ऐप्स के मुकाबले और मजबूत करेगा। सरकारी समर्थन और NPCI की विश्वसनीयता BHIM की बड़ी ताकत है। नए बैंक जुड़ने से यूजर बेस में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। इससे ट्रांजैक्शन वॉल्यूम भी बढ़ेगा। डिजिटल भुगतान के आंकड़ों में भारत की वैश्विक स्थिति और सुदृढ़ होगी। अंततः, यह कदम देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।

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10 दिनों में बायोमेट्रिक UPI रोलआउट

NPCI ने बायोमेट्रिक आधारित UPI भुगतान को लेकर बड़ा ऐलान किया है। CEO के अनुसार, अगले 10 दिनों में इसका रोलआउट शुरू हो जाएगा। इस तकनीक के तहत फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन से भुगतान संभव होगा। इससे पिन याद रखने की जरूरत नहीं रहेगी। खासतौर पर बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे उपयोगकर्ताओं को इससे सुविधा मिलेगी। सुरक्षा के लिहाज से भी यह सिस्टम अधिक मजबूत माना जा रहा है।

बायोमेट्रिक UPI का परीक्षण पहले ही सीमित स्तर पर किया जा चुका है। शुरुआती नतीजे सकारात्मक रहे हैं। NPCI ने इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी कर ली है। यह तकनीक आधार-आधारित प्रमाणीकरण के साथ काम करेगी। इससे फर्जी लेनदेन के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। डिजिटल भुगतान में भरोसा बढ़ाने के लिए यह अहम कदम है।

इस नई सुविधा का लाभ खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। वहां आज भी पिन-आधारित सिस्टम में कठिनाइयां सामने आती हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से भुगतान प्रक्रिया सरल होगी। NPCI इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। पहले चुनिंदा बैंकों और मर्चेंट्स पर इसे शुरू किया जाएगा। बाद में इसे पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा।

फिनटेक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत को वैश्विक डिजिटल भुगतान में अग्रणी बनाएगा। बायोमेट्रिक सुरक्षा से यूजर अनुभव बेहतर होगा। इससे UPI ट्रांजैक्शन में और वृद्धि संभव है। सरकार की वित्तीय समावेशन नीति को भी बल मिलेगा। डिजिटल साक्षरता बढ़ाने में यह तकनीक सहायक होगी। कुल मिलाकर, यह UPI का अगला बड़ा अपग्रेड साबित हो सकता है।

डिजिटल भुगतान सुरक्षा पर NPCI का फोकस

NPCI लगातार डिजिटल भुगतान सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। बायोमेट्रिक UPI इसी दिशा में उठाया गया कदम है। इसके साथ ही, फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम को भी मजबूत किया जा रहा है। NPCI रियल-टाइम ट्रांजैक्शन एनालिसिस पर काम कर रहा है। इससे संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान संभव होगी। उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखना NPCI की मुख्य रणनीति है।

BHIM और UPI प्लेटफॉर्म पर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी लागू की गई है। इसमें एन्क्रिप्शन और टोकनाइजेशन जैसी तकनीकें शामिल हैं। NPCI बैंकों के साथ मिलकर नियमित सुरक्षा ऑडिट भी करता है। इससे सिस्टम में कमजोरियों की पहचान होती है। समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किए जाते हैं। यह सतत प्रक्रिया डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाती है।

NPCI उपभोक्ताओं को जागरूक करने पर भी जोर दे रहा है। साइबर सुरक्षा से जुड़े संदेश और अलर्ट नियमित रूप से जारी किए जाते हैं। BHIM ऐप में भी सुरक्षा टिप्स उपलब्ध कराए गए हैं। इससे यूजर खुद को फ्रॉड से बचा सकते हैं। डिजिटल भुगतान में शिक्षा और तकनीक दोनों जरूरी हैं। NPCI इस संतुलन को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

भविष्य में NPCI और उन्नत सुरक्षा फीचर्स लाने की योजना बना रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फ्रॉड डिटेक्शन पर काम चल रहा है। इससे जोखिम और कम होंगे। डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ने के साथ सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ती है। NPCI इस चुनौती को गंभीरता से ले रहा है। यही वजह है कि भारत का UPI सिस्टम विश्व स्तर पर सराहा जा रहा है।

भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम पर असर

BHIM विस्तार और बायोमेट्रिक UPI रोलआउट का असर पूरे फिनटेक इकोसिस्टम पर पड़ेगा। इससे डिजिटल भुगतान को नई दिशा मिलेगी। स्टार्टअप्स को नए इनोवेशन के अवसर मिलेंगे। बैंकिंग और फिनटेक के बीच सहयोग बढ़ेगा। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। भारत का डिजिटल भुगतान बाजार और मजबूत होगा।

फिनटेक कंपनियां अब बायोमेट्रिक आधारित समाधानों पर ज्यादा काम कर सकती हैं। इससे नई तकनीकों का विकास होगा। NPCI की पहल से इंडस्ट्री में विश्वास बढ़ेगा। विदेशी निवेशकों की भी रुचि बढ़ सकती है। भारत पहले ही UPI के जरिए वैश्विक पहचान बना चुका है। यह कदम उस पहचान को और पुख्ता करेगा।

सरकार की डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन योजनाओं को भी इससे बल मिलेगा। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डिजिटल भुगतान आसान होगा। इससे आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी। टैक्स कलेक्शन और सब्सिडी ट्रांसफर में भी सुधार होगा। डिजिटल लेनदेन से नकदी पर निर्भरता घटेगी। यह दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों में सहायक होगा।

कुल मिलाकर, NPCI की यह रणनीति भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। BHIM का विस्तार और बायोमेट्रिक UPI भारत को डिजिटल भुगतान का वैश्विक लीडर बना सकता है। उपभोक्ता, बैंक और सरकार सभी को इसका लाभ मिलेगा। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। डिजिटल अर्थव्यवस्था की रफ्तार और तेज होगी। भारत का फिनटेक भविष्य उज्ज्वल नजर आ रहा है।

FAQs

प्रश्न 1: बायोमेट्रिक UPI क्या सभी स्मार्टफोन पर काम करेगा?
उत्तर: यह सुविधा उन डिवाइस पर बेहतर काम करेगी जिनमें फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेशन हार्डवेयर उपलब्ध है।

प्रश्न 2: नए बैंक BHIM में कब तक पूरी तरह जुड़ जाएंगे?
उत्तर: NPCI के अनुसार, 2026 के भीतर दोनों बैंकों की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।

प्रश्न 3: क्या बायोमेट्रिक UPI से ट्रांजैक्शन शुल्क बढ़ेगा?
उत्तर: फिलहाल NPCI ने किसी अतिरिक्त शुल्क की घोषणा नहीं की है।

प्रश्न 4: क्या बायोमेट्रिक फेल होने पर पिन से भुगतान संभव होगा?
उत्तर: हां, बैकअप विकल्प के तौर पर पिन-आधारित भुगतान उपलब्ध रहेगा।

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