ओवरफिटिंग क्या है? मशीन लर्निंग में ओवरफिटिंग समझें हिंदी में

ओवरफिटिंग क्या है? मशीन लर्निंग में एक सामान्य समस्या

सामग्री की तालिका

परिचय

मशीन लर्निंग की दुनिया में ओवरफिटिंग एक ऐसी समस्या है जो कई डेटा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को परेशान करती है। यह तब होता है जब कोई मॉडल प्रशिक्षण डेटा को इतनी अच्छी तरह सीख लेता है कि वह वास्तविक दुनिया के नए डेटा पर असफल हो जाता है। ओवरफिटिंग को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मॉडल की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। हाल के वर्षों में, एआई के विकास के साथ इस समस्या पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही तकनीकों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इस लेख में हम ओवरफिटिंग की गहराई से जांच करेंगे।

ओवरफिटिंग की शुरुआत मॉडल के प्रशिक्षण चरण से होती है जहां डेटा के पैटर्न को सीखा जाता है। लेकिन जब मॉडल अनावश्यक विवरणों को भी याद कर लेता है, तो समस्या उत्पन्न होती है। यह एक प्रकार की अतिरिक्त सीखने की स्थिति है जो सामान्यीकरण को बाधित करती है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, कई बड़े प्रोजेक्ट्स में ओवरफिटिंग के कारण लाखों डॉलर का नुकसान हुआ है। इसलिए, इसे पहचानना और रोकना आवश्यक है। इस परिचय से हम आगे के बिंदुओं की ओर बढ़ेंगे।

मशीन लर्निंग मॉडल्स को डिजाइन करते समय ओवरफिटिंग एक प्रमुख चुनौती है। यह मॉडल की परफॉर्मेंस को असंतुलित बना देता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित जांच से इसे रोका जा सकता है। हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि ओवरफिटिंग बड़े डेटासेट्स में भी हो सकती है। इसलिए, सतर्क रहना जरूरी है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों को ओवरफिटिंग के बारे में जागरूक बनाना है।

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ओवरफिटिंग को समझने से पहले, हमें मशीन लर्निंग के बेसिक्स को याद करना चाहिए। मॉडल ट्रेनिंग डेटा से सीखते हैं और टेस्ट डेटा पर परीक्षण किए जाते हैं। जब अंतर बहुत अधिक होता है, तो ओवरफिटिंग का संकेत मिलता है। समाचार स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, यह समस्या स्वास्थ्य और वित्तीय क्षेत्रों में अधिक देखी जाती है। रोकथाम के उपाय अपनाकर हम बेहतर मॉडल बना सकते हैं। आइए अब मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करें।

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ओवरफिटिंग की परिभाषा

ओवरफिटिंग वह स्थिति है जिसमें मशीन लर्निंग मॉडल प्रशिक्षण डेटा को अत्यधिक अच्छी तरह फिट कर लेता है। यह मॉडल डेटा के शोर और अनियमितताओं को भी सीख लेता है। परिणामस्वरूप, नए डेटा पर इसका प्रदर्शन गिर जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक सामान्य गलती है जो शुरुआती डेवलपर्स करते हैं। ओवरफिटिंग की पहचान से मॉडल की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। इसलिए, इसकी परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है।

ओवरफिटिंग में मॉडल सामान्य पैटर्न के बजाय विशिष्ट उदाहरणों को प्राथमिकता देता है। यह ट्रेनिंग सेट की हर बारीकी को कैद कर लेता है। लेकिन वास्तविक उपयोग में यह असफल साबित होता है। समाचार रिपोर्टों में उल्लेख है कि ओवरफिटिंग के कारण कई एआई प्रोजेक्ट फेल हुए हैं। इसे समझने से हम बेहतर रणनीतियां बना सकते हैं। परिभाषा की गहराई हमें आगे की चर्चा के लिए तैयार करती है।

ओवरफिटिंग को सांख्यिकीय रूप से समझा जा सकता है जहां वैरियंस अधिक होता है। मॉडल की जटिलता इस समस्या को बढ़ाती है। सरल शब्दों में, यह अतिरिक्त फिटिंग है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि परिभाषा को उदाहरणों से जोड़कर समझें। इससे व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है। ओवरफिटिंग की परिभाषा मशीन लर्निंग की आधारशिला है।

इस समस्या की परिभाषा में ट्रेनिंग और टेस्टिंग के बीच का अंतर प्रमुख है। मॉडल जब ट्रेनिंग पर परफेक्ट स्कोर करता है लेकिन टेस्ट पर नहीं, तो ओवरफिटिंग है। हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि यह डीप लर्निंग में अधिक आम है। परिभाषा को याद रखकर हम इसे पहचान सकते हैं। इससे मॉडल डेवलपमेंट में सुधार होता है। आइए अब अगले बिंदु पर जाएं।

उच्च प्रशिक्षण सटीकता, कम टेस्ट सटीकता

ओवरफिटिंग का सबसे बड़ा संकेत ट्रेनिंग डेटा पर उच्च सटीकता और टेस्ट डेटा पर कम सटीकता है। उदाहरण के लिए, ट्रेनिंग पर 99% लेकिन टेस्ट पर 70%। यह अंतर मॉडल की ओवरफिटिंग को दर्शाता है। समाचारों में ऐसे कई केस रिपोर्ट किए गए हैं जहां यह समस्या प्रमुख थी। इसे मापने के लिए मीट्रिक्स का उपयोग किया जाता है। इसलिए, इस संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उच्च ट्रेनिंग एक्यूरेसी मॉडल की क्षमता दिखाती है लेकिन कम टेस्ट एक्यूरेसी समस्या है। यह मॉडल के सामान्यीकरण की कमी को इंगित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर 10-20% से अधिक नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ओवरफिटिंग के कारण प्रोजेक्ट्स में देरी होती है। इसे सुधारने के लिए तकनीकें उपलब्ध हैं। इस बिंदु की समझ से हम बेहतर मॉडल बना सकते हैं।

ट्रेनिंग और टेस्ट सेट को अलग रखना इस समस्या की पहचान में मदद करता है। जब ट्रेनिंग स्कोर बढ़ता है लेकिन टेस्ट गिरता है, तो सावधान रहें। समाचार स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, यह डेटा साइंस में आम है। मीट्रिक्स की निगरानी से इसे रोका जा सकता है। उच्च सटीकता का मतलब हमेशा अच्छा मॉडल नहीं होता। इस संकेत को समझना महत्वपूर्ण है।

इस अंतर को ग्राफ्स से भी देखा जा सकता है जहां कर्व्स अलग हो जाते हैं। ओवरफिटिंग में ट्रेनिंग कर्व नीचे जाती है लेकिन टेस्ट ऊपर। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित वैलिडेशन करें। हालिया घटनाओं में ओवरफिटिंग ने बड़ी कंपनियों को प्रभावित किया। इसे पहचानकर हम जोखिम कम कर सकते हैं। अब अगले बिंदु की ओर।

मॉडल बहुत जटिल हो जाता है

ओवरफिटिंग का एक प्रमुख कारण मॉडल की अत्यधिक जटिलता है। बहुत सारे पैरामीटर्स होने से मॉडल डेटा को ओवरफिट कर लेता है। यह लेयर्स की गहराई या फीचर्स की संख्या से जुड़ा है। समाचार रिपोर्टों में उल्लेख है कि सरल मॉडल्स बेहतर होते हैं। जटिलता को नियंत्रित करने से ओवरफिटिंग कम होती है। इसलिए, मॉडल डिजाइन में सावधानी बरतें।

जटिल मॉडल ट्रेनिंग डेटा को आसानी से फिट कर लेते हैं लेकिन जनरलाइज नहीं कर पाते। यह एक प्रकार की अतिरिक्त क्षमता है जो हानिकारक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ओकम्स रेजर सिद्धांत यहां लागू होता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि जटिलता बड़े डेटासेट्स में भी समस्या पैदा करती है। इसे कम करने के लिए प्रूनिंग तकनीकें हैं। इस कारण की समझ आवश्यक है।

मॉडल की जटिलता पैरामीटर्स की संख्या से मापी जाती है। अधिक पैरामीटर्स ओवरफिटिंग को बढ़ावा देते हैं। समाचारों से पता चलता है कि डीप न्यूरल नेटवर्क्स में यह आम है। जटिलता को बैलेंस करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सरल से शुरू करें। इस बिंदु से हम सीख सकते हैं।

जटिल मॉडल को ट्रेन करने में अधिक समय लगता है और ओवरफिटिंग का जोखिम बढ़ता है। इसे रोकने के लिए रेगुलराइजेशन उपयोगी है। हालिया अध्ययनों में जटिलता और ओवरफिटिंग का संबंध सिद्ध हुआ है। मॉडल चयन में इस पर ध्यान दें। इससे मशीन लर्निंग प्रोजेक्ट्स सफल होते हैं। अब आगे बढ़ते हैं।

ट्रेनिंग और टेस्ट डेटा में अंतर

ओवरफिटिंग में मॉडल ट्रेनिंग डेटा के शोर और आउटलायर्स को भी सीख लेता है। यह टेस्ट डेटा से अलग होता है जो साफ होता है। परिणामस्वरूप, प्रदर्शन में अंतर आता है। समाचार रिपोर्टों में ऐसे उदाहरण हैं जहां यह अंतर घातक साबित हुआ। डेटा की गुणवत्ता यहां महत्वपूर्ण है। इसलिए, अंतर को कम करने के प्रयास करें।

ट्रेनिंग डेटा में अनियमितताएं मॉडल को भ्रमित करती हैं। टेस्ट डेटा नया होने से मॉडल असफल होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा प्रीप्रोसेसिंग से इसे रोका जा सकता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अंतर बड़े प्रोजेक्ट्स में समस्या है। इसे समझकर हम बेहतर डेटा हैंडलिंग कर सकते हैं। इस बिंदु की गहराई उपयोगी है।

डेटा में अंतर शोर के कारण होता है जो ट्रेनिंग में शामिल होता है। मॉडल इसे पैटर्न मान लेता है। समाचार स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, यह सामान्य है। अंतर को मापने के लिए स्टेटिस्टिकल टेस्ट हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डेटा को बैलेंस करें। इससे ओवरफिटिंग कम होती है।

इस अंतर को कम करने से मॉडल की विश्वसनीयता बढ़ती है। ओवरफिटिंग में यह अंतर स्पष्ट दिखता है। हालिया घटनाओं में डेटा अंतर ने प्रभाव डाला। इसे पहचानकर सुधार संभव है। डेटा मैनेजमेंट में ध्यान दें। अब अगला बिंदु।

जनरलाइजेशन की कमी

ओवरफिटिंग मॉडल में जनरलाइजेशन की कमी पैदा करता है। मॉडल नए डेटा पर सामान्य नियम लागू नहीं कर पाता। यह ट्रेनिंग सेट तक सीमित रह जाता है। समाचार रिपोर्टों में उल्लेख है कि जनरलाइजेशन एआई की कुंजी है। कमी को दूर करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। इसलिए, जनरलाइजेशन पर फोकस करें।

जनरलाइजेशन की कमी से मॉडल वास्तविक दुनिया में असफल होता है। यह एक प्रकार की सीमित दृष्टि है। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक डेटा से इसे सुधारा जा सकता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कमी बड़े स्केल पर समस्या है। इसे समझकर हम रणनीतियां बना सकते हैं। इस बिंदु से सीख लें।

मॉडल की जनरलाइजेशन क्षमता वैलिडेशन सेट से मापी जाती है। कमी ओवरफिटिंग का परिणाम है। समाचारों से पता चलता है कि यह डेटा साइंस में चुनौती है। जनरलाइजेशन को बढ़ाने के तरीके उपलब्ध हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि विविध डेटा उपयोग करें। इससे सुधार होता है।

कमी को दूर करने से मॉडल की उपयोगिता बढ़ती है। ओवरफिटिंग में यह कमी प्रमुख है। हालिया अध्ययनों में जनरलाइजेशन पर जोर दिया गया है। इसे पहचानकर हम बेहतर मॉडल डिजाइन कर सकते हैं। जनरलाइजेशन की महत्वपूर्णता समझें। अब आगे।

लर्निंग कर्व का व्यवहार

ओवरफिटिंग में लर्निंग कर्व ट्रेनिंग लॉस को कम लेकिन वैलिडेशन लॉस को बढ़ाती है। यह एक क्लासिक संकेत है। ग्राफ से इसे आसानी से देखा जा सकता है। समाचार रिपोर्टों में ऐसे ग्राफ्स के उदाहरण हैं। कर्व का व्यवहार मॉडल की स्थिति बताता है। इसलिए, कर्व्स की निगरानी करें।

लर्निंग कर्व ट्रेनिंग प्रक्रिया को दर्शाता है। ओवरफिटिंग में कर्व्स अलग हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एपॉक्स बढ़ने से होता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कर्व विश्लेषण उपयोगी है। इसे समझकर हम स्टॉपिंग पॉइंट तय कर सकते हैं। इस बिंदु की उपयोगिता अधिक है।

कर्व का व्यवहार लॉस फंक्शन पर आधारित है। ट्रेनिंग लॉस गिरता है लेकिन वैलिडेशन बढ़ता है। समाचार स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, यह सामान्य है। कर्व्स को प्लॉट करके जांचें। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अर्ली स्टॉपिंग अपनाएं। इससे ओवरफिटिंग रुकती है।

इस व्यवहार को समझने से मॉडल ट्रेनिंग बेहतर होती है। ओवरफिटिंग में कर्व प्रमुख इंडिकेटर है। हालिया घटनाओं में कर्व विश्लेषण ने मदद की। इसे अपनाकर सुधार संभव है। लर्निंग कर्व की महत्वपूर्णता जानें। अब अगला।

ओवरफिटिंग के मुख्य कारण

ओवरफिटिंग के मुख्य कारणों में कम ट्रेनिंग डेटा प्रमुख है। जटिल मॉडल भी इसका कारण बनता है। अपर्याप्त रेगुलराइजेशन समस्या बढ़ाता है। ज्यादा एपॉक्स ट्रेनिंग से भी यह होता है। समाचार रिपोर्टों में इन कारणों का उल्लेख है। इसलिए, कारणों को जानकर रोकें।

कम डेटा मॉडल को ओवरफिट करने के लिए मजबूर करता है। जटिलता अतिरिक्त फिटिंग को बढ़ावा देती है। रेगुलराइजेशन की कमी पैरामीटर्स को अनियंत्रित छोड़ देती है। एपॉक्स बढ़ाने से शोर सीखा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन कारणों पर नियंत्रण जरूरी है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कारण समझना समाधान की कुंजी है।

मुख्य कारण डेटा और मॉडल डिजाइन से जुड़े हैं। कम डेटा विविधता की कमी पैदा करता है। समाचारों से पता चलता है कि कारण बहुआयामी हैं। रेगुलराइजेशन तकनीकें उपयोगी हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कारणों का विश्लेषण करें। इससे ओवरफिटिंग कम होती है।

इन कारणों को दूर करने से मॉडल बेहतर बनता है। ओवरफिटिंग के कारण पहचानना आसान है। हालिया अध्ययनों में कारणों पर फोकस है। इसे अपनाकर हम सफल हो सकते हैं। मुख्य कारणों की समझ लें। अब उदाहरण पर।

उदाहरण से समझें

ओवरफिटिंग को छात्र के उदाहरण से समझें जो पिछले पेपर्स रट लेता है। लेकिन नए सवालों पर असफल होता है। यह ट्रेनिंग डेटा को रटने जैसा है। समाचार रिपोर्टों में ऐसे एनालॉजी उपयोगी बताए गए हैं। उदाहरण से अवधारणा स्पष्ट होती है। इसलिए, व्यावहारिक उदाहरण लें।

छात्र पिछले 10 साल के पेपर्स को याद कर लेता है। लेकिन सवाल बदलने पर जवाब नहीं दे पाता। यह ओवरफिटिंग का सटीक उदाहरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि एनालॉजी समझ आसान बनाती है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि उदाहरण शिक्षा में मदद करते हैं। इस उदाहरण से सीखें।

उदाहरण में छात्र सामान्य अवधारणाओं को नहीं सीखता। सिर्फ विशिष्ट पैटर्न रटता है। समाचार स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, यह आम है। उदाहरण को विस्तार से समझें। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रियल-लाइफ एनालॉजी उपयोग करें। इससे ओवरफिटिंग की गहराई पता चलती है।

इस उदाहरण से ओवरफिटिंग की समस्या स्पष्ट होती है। छात्र की तरह मॉडल भी ओवरफिट होता है। हालिया घटनाओं में उदाहरणों ने जागरूकता बढ़ाई। इसे अपनाकर समझ बढ़ाएं। उदाहरण की शक्ति जानें। अब रोकथाम पर।

ओवरफिटिंग से बचने के प्रमुख तरीके

ओवरफिटिंग से बचने के लिए अधिक डेटा इकट्ठा करें। डेटा ऑगमेंटेशन उपयोगी है। Dropout और L1/L2 रेगुलराइजेशन अपनाएं। Early Stopping से ट्रेनिंग रोकें। Cross-Validation से जांचें। सरल मॉडल से शुरू करें।

अधिक डेटा विविधता बढ़ाता है जो ओवरफिटिंग कम करता है। ऑगमेंटेशन नए वेरिएशंस बनाता है। Dropout रैंडमली न्यूरॉन्स ड्रॉप करता है। रेगुलराइजेशन पैरामीटर्स को पेनलाइज करता है। Early Stopping वैलिडेशन लॉस बढ़ने पर रोकता है। Cross-Validation डेटा को विभाजित करता है।

ये तरीके विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए हैं। समाचार रिपोर्टों में इनकी सफलता बताई गई है। सरल मॉडल जटिलता कम करता है। तरीकों को लागू करने से परिणाम सुधरते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि तरीके प्रभावी हैं। इनसे ओवरफिटिंग नियंत्रित होती है।

बचाव के तरीके अपनाकर मॉडल विश्वसनीय बनाएं। हालिया अध्ययनों में इन पर जोर है। तरीकों की समझ से हम बेहतर काम कर सकते हैं। इसे प्रैक्टिस में लाएं। प्रमुख तरीकों को याद रखें। अब अंतिम बिंदु।

ओवरफिटिंग vs अंडरफिटिंग vs अच्छा मॉडल

ओवरफिटिंग में ट्रेन पर अच्छा लेकिन टेस्ट पर खराब। अंडरफिटिंग में दोनों पर खराब। अच्छा मॉडल दोनों पर संतुलित। समाचार रिपोर्टों में इनकी तुलना है। तुलना से समझ बढ़ती है। इसलिए, अंतर जानें।

अंडरफिटिंग सरल मॉडल से होता है। ओवरफिटिंग जटिल से। अच्छा मॉडल बैलेंस रखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैलेंस कुंजी है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि तुलना उपयोगी है। इस बिंदु से सीखें।

तुलना में ओवरफिटिंग वैरियंस अधिक, अंडरफिटिंग बायस अधिक। अच्छा मॉडल दोनों कम। समाचार स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, यह महत्वपूर्ण है। तुलना ग्राफ्स से करें। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बैलेंस बनाएं। इससे सफलता मिलती है।

इस तुलना को समझने से मॉडल चयन आसान होता है। ओवरफिटिंग और अंडरफिटिंग दोनों हानिकारक। अच्छा मॉडल लक्ष्य है। हालिया अध्ययनों में तुलना पर फोकस है। इसे अपनाकर सुधार करें। अब FAQs पर।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

ओवरफिटिंग और ओवरट्रेनिंग में क्या अंतर है?

ओवरफिटिंग मॉडल की स्थिति है जबकि ओवरट्रेनिंग ट्रेनिंग प्रक्रिया है जो ओवरफिटिंग का कारण बन सकती है। ओवरट्रेनिंग में ज्यादा एपॉक्स से मॉडल ओवरफिट होता है। लेकिन दोनों अलग हैं। ओवरट्रेनिंग को रोककर ओवरफिटिंग से बचा जा सकता है। यह अंतर जानना महत्वपूर्ण है। कई लोग इन्हें एक समझते हैं लेकिन नहीं।

ओवरफिटिंग रिग्रेशन मॉडल्स में कैसे प्रभावित करता है?

रिग्रेशन में ओवरफिटिंग RMSE को ट्रेन पर कम लेकिन टेस्ट पर अधिक करता है। यह कर्व को अनियमित बनाता है। रिग्रेशन स्पेसिफिक तरीके जैसे रिज रिग्रेशन उपयोगी हैं। प्रभाव डेटा की लीनियरिटी पर निर्भर करता है। इसे पहचानना रिग्रेशन टास्क्स में जरूरी है। इससे पूर्वानुमान प्रभावित होते हैं।

क्लासिफिकेशन vs रिग्रेशन में ओवरफिटिंग का अंतर क्या है?

क्लासिफिकेशन में एक्यूरेसी मीट्रिक प्रभावित होती है जबकि रिग्रेशन में MSE। लेकिन दोनों में ओवरफिटिंग जनरलाइजेशन कम करता है। क्लासिफिकेशन में कन्फ्यूजन मैट्रिक्स से देखा जाता है। अंतर मीट्रिक्स में है लेकिन समस्या समान। समझना दोनों के लिए उपयोगी है। इससे टास्क स्पेसिफिक सॉल्यूशंस मिलते हैं।

ओवरफिटिंग को मापने के लिए कौन से उन्नत मीट्रिक्स हैं?

AIC और BIC जैसे मीट्रिक्स ओवरफिटिंग मापते हैं। ये जटिलता को पेनलाइज करते हैं। क्रॉस-वैलिडेशन स्कोर भी उपयोगी है। उन्नत मीट्रिक्स डीप लर्निंग में महत्वपूर्ण हैं। इन्हें अपनाकर बेहतर मूल्यांकन करें। ये लेख में वर्णित बेसिक मीट्रिक्स से अलग हैं।

ओवरफिटिंग एनसेंबल मॉडल्स में कैसे कम होता है?

एनसेंबल जैसे रैंडम फॉरेस्ट कई मॉडल्स को कम्बाइन करते हैं। इससे वैरियंस कम होता है। बूस्टिंग भी ओवरफिटिंग को नियंत्रित करता है। एनसेंबल विविधता से लाभ देते हैं। यह तरीका लेख में उल्लिखित नहीं है। इससे मजबूत मॉडल बनते हैं।

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